भीलवाड़ा बना ‘भक्ति का कुंभ’: शिव महापुराण कथा में उमड़ा आस्था का सागर, टूटे सभी रिकॉर्ड

भीलवाड़ा समाचार 
भीलवाड़ा( महेन्द्र नागौरी) धर्मनगरी में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा ने भक्ति का ऐसा इतिहास रच दिया, जिसे वर्षों तक याद रखा जाएगा। विराम दिवस पर मंगलवार को आस्था का जनसैलाब इस कदर उमड़ा कि मेडिसिटी ग्राउंड का विशाल पांडाल भी छोटा पड़ गया। सड़कों से लेकर खुले आसमान तक, हर जगह शिवभक्तों की भीड़ नजर आई।
प्रख्यात कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के मुखारविंद से हुई कथा के अंतिम दिन लाखों श्रद्धालु रात से ही पहुंचने लगे। सुबह होते-होते हालात ऐसे बने कि पांडाल में पैर रखने की जगह तक नहीं बची। धूप और भीड़ के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ।
कथा के दौरान पंडित मिश्रा ने कहा कि यह आयोजन भीलवाड़ा के इतिहास का पहला “कुंभ” बन गया है, जहां रात-रात भर लोग शिवभक्ति में डूबे रहे। उन्होंने आयोजन के लिए महामंडलेश्वर बाबूगिरी महाराज और विधायक अशोक कोठारी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इतनी विशाल भीड़ के बावजूद व्यवस्थाएं उत्कृष्ट रहीं, जिसके लिए भीलवाड़ावासी साधुवाद के पात्र हैं।
उन्होंने जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा—“पैसे वाला होना आसान है, लेकिन सच्चा अमीर वही है जिसे सुकून की नींद और निरोगी काया मिले।” साथ ही गौसेवा को सनातन धर्म का आधार बताते हुए इसे शिक्षा में शामिल करने की आवश्यकता बताई।
कथा के दौरान ‘म्हारो चारभुजा रो नाथ’ जैसे भजनों पर लाखों श्रद्धालु झूम उठे। भक्ति का ऐसा माहौल बना कि हर ओर शिवमय वातावरण नजर आया। कई श्रद्धालुओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि शिव भक्ति से उनके जीवन की समस्याओं का समाधान हुआ।
सात दिन तक कथा में डटे रहे श्रद्धालु विराम के बाद पांडाल की पवित्र रज माथे पर लगाकर भावुक मन से अपने-अपने गंतव्य की ओर रवाना हुए। बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर भी श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिली।
आयोजन समिति के अध्यक्ष विधायक अशोक कोठारी ने सभी सहयोगियों, प्रशासन, पुलिस, मीडिया और समाज के हर वर्ग का आभार जताते हुए इसे सामूहिक प्रयास की ऐतिहासिक सफलता बताया।
भीलवाड़ा में उमड़ा यह आस्था का सागर न सिर्फ एक धार्मिक आयोजन रहा, बल्कि यह श्रद्धा, सेवा और एकता का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया।